Saturday, January 10, 2026
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संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बड़े चलो, पंच परिवर्तन से होगा राष्ट्र उत्थान – सुनिल बागुल आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर शहर में निकला पथ संचलन, नेहरू स्टेडियम ग्राउंड से निकला पथ संचलन।

  • संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बड़े चलो, पंच परिवर्तन से होगा राष्ट्र उत्थान – सुनिल बागुल
  • आरएसएस के 100 पूरे होने पर शहर में निकला पथ संचलन, नेहरू स्टेडियम ग्राउंड से निकला पथ संचलन, जगह जगह स्वागत हुआ

बुरहानपुर (न्यूज़ ढाबा)–राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 पूरो होने पर रविवार शाम विजयादशमी के उपलक्ष्य में पथ संचलन निकाला गया। स्टेडियम ग्राउंड से पथ संचलन शहरभर में निकला जिसमें हजारों की संख्या में स्वयंसेवक शामिल हुए। अनुशासित तरीके से स्वयंसेवक एक साथ बैंड की धुन पर कदमताल करते हुए पथ संचलन में शामिल हुए।

हर साल विजयादशमी पर आरएसएस का पथ संचलन निकलता है, लेकिन इस बार शताब्दी वर्ष पूरा होने पर विशेष आयोजन हुआ। हर परिवार से एक एक सदस्य को पथ संचलन में शामिल करने का निर्णय लिया था। शाम 4.30 नेहरू स्टेडियम ग्राउंड पर मुख्य वक्ता सुनील बागुल मालवा प्रांत के बौद्धिक प्रमुख, मुख्य अतिथि कृष्णदास भगत, जिला सर संघचालक विजय पोद्दार, और नगर सर संघचालक राजेंद्र सिंघाल पहुंचे।

मालवा प्रांत के बौद्धिक प्रमुख व मुख्य वक्ता सुनील बागुल ने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को माता बहनों, ओर बच्चों के मन मे देश के प्रति प्रेम भावना और मातृभूमि के प्रति अपनी कर्तव्य निष्ठा का भाव जागरण करना होगा। इसकी शुरुआत हमे खुद से करनी होगी। संघ शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन जिन्हें हम पांच संकल्प कह सकते है। इसपर समाज को ध्यान देने की आवश्यकता है। पंच परिवर्तन से ही राष्ट्र का निर्माण होगा।

श्री बागुल ने कहा आजादी में भी स्वदेसी का उपयोग किया। अब इसे व्यवहार में लाएं। हम किसी भी संस्थान में लाइन में लगना पड़ता है। मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं तो वहां हमें अनुशासन का पालन करना चाहिए। किसी को कष्ट न पहुंचाते हुए हमें अनुशासन का पालन करना चाहिए। शाखा से जो पद्धत्ति मिली है उससे जब व्यक्ति बाहर निकलता है तो एक श्रेष्ठ नागरिक बनता है। संघ की स्थापना का उद्देश्य है कि हमारा देश फिर विश्व गुरू हो। वैभव संपन्न हो जाए। जो जिस स्थान पर है वह अपना देश मानकर काम करता है। देश के लिए जीने की आवश्यकता है। समाज परिवर्तन की दिशा में काम करना है। संघ को 100 साल हो गए। बुरहानपुर में खुद संघ प्रमुख डॉ. बलीराम हेडगेवार ने आकर शाखा प्रारंभ की थी। पथ संचलन निकलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार का संचलन इसलिए विशेष है कि हर मंडल में यह संचलन निकलेगा। सभी मिलकर घर घर संपर्क करेंगे। पत्रक लेकर जाएंगे। सामाजिक सद्भाव की बैठकें करेंगे। हिन्दू सम्मेलन आयोजित होंगे। हिन्दू समाज अपनी पहचान स्थापित करेगा। जीने के तरीके है, उसे अपने व्यवहार में लेकर आएंगे। प्रमुख नागरिक जन गोष्ठी, युवा संगम प्रत्येक खंड, जिले, प्रांत में होगा। समाज के बीच में जाकर समाज परिवर्तन का माध्यम बनना है। समाज में सामाजिक समरस्ता दिखे यह प्रयास करना है। कुटुंब व्यवस्था को फिर से स्थापित करने के लिए अपने परिवार, अपने घर से कार्यक्रम प्रारंभ करें। पर्यावरण को लेकर प्रयास करेंगे।

30 बस्तियों से उमड़े स्वयंसेवक

शहर की 30 बस्तियों से स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए। 30 वाहिनी से संपत, 10 दंड वाहिनी और 7 घोष दल के साथ स्वयंसेवकों ने जब कदमताल किया तो पूरा नगर थम सा गया। मातृशक्ति और समाजजन छतों व चौक-चौराहों पर खड़े होकर पुष्पवर्षा कर रहे थे। जगह-जगह स्वागत द्वार, रंगोली और पुष्पमालाओं से संचलन का अभिनंदन किया गया।

यहां से निकला पथ संचलन

पथ संचलन नेहरू स्टेडियम ग्राउंड से निकलकर शनवारा, जय स्तंभ, सुभाष चौक, फव्वारा चौक, पांडुमल चौराहा, राजपुरा और बस स्टैंड से होते हुए वापस स्टेडियम ग्राउंड पर पहुंचा।

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