Saturday, January 10, 2026
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अब गांव नहीं जाएंगे शहर की ओर, योजनाएं खुद चलकर आएंगी गांव की चौखट पर – सांसद पाटील

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना

अब गांव नहीं जाएंगे शहर की ओर, योजनाएं खुद चलकर आएंगी गांव की चौखट पर – सांसद पाटील।

– सांसद के प्रयास से जिले के 116 ग्रामो का हुआ चयन
– भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना
– सांसद ने पीएम मोदी का माना आभार
– नेपानगर विधायक मंजू दादू ने पीएम, सीएम और सांसद का माना आभार

बुरहानपुर(न्यूज़ ढाबा)– जिले के आदिवासी बाहुल्य गांवो की तस्वीर जल्द बदलने वाली है। इस बार गांव नहीं जाएगा शहर की ओर, बल्कि योजनाएं खुद चलकर आएंगी गांवों की चौखट तक जनजातीय (आदिवासी) क्षेत्रों के विकास की दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने एक बड़ी पहल की है। 15 जून से 30 जून 2025 तक “धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना” के अंतर्गत “धरती आबा जागरूकता एवं संतृप्तिकरण अभियान” शुरू किया जा रहा है। खंडवा लोकसभा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने कहा कि यह बड़े ही हर्ष का विषय है कि बुरहानपुर जिले के 116 गांवो का इस योजना अंतर्गत चयन हुआ है। इन गांवो में 15 से 30 जून तक सरकारी अमला घर-घर जाकर योजनाओं की जानकारी देगा दस्तावेज बनाएगा और शिविर के माध्यम से मौके पर ही लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी पूर्ण की जाएगी। भारत सरकार के इस महत्वकांक्षी योजना अंतर्गत संसदीय क्षेत्र के ग्रामों को शामिल करने पर सांसद श्री पाटील ने प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त किया है। इस योजना अंतर्गत नेपानगर विधानसभा के सबसे अधिक गांवो का चयन हुआ है। नेपानगर विधायक मंजू दादू ने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी, सांसद श्री ज्ञानेश्वर पाटील जी का आभार व्यक्त किया है। सांसद श्री पाटील ने बताया कि “धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना”: इस अभियान का उद्देश्य है जनजातीय (आदिवासी) बाहुल्य गांवों तक सभी शासकीय योजनाओं का समावेशी लाभ पहुंचाना, ताकि अंतिम छोर के व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं की रोशनी पहुंच सके।इन गांवों में सरकारी टीमें डोर टू डोर पहुंचकर पात्र हितग्राहियों को योजनाओं की जानकारी देंगी और मौके पर ही आवश्यक दस्तावेजों के साथ योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

*इसलिए खास है धरती आबा अभियान- मंजू दादु*

नेपानगर विधायक मंजू दादु ने बताया कि धरती आबा यानी “धरती के पिता”, यह नाम ही आदिवासी संस्कृति और सम्मान का प्रतीक है। यह अभियान सिर्फ योजनाओं का वितरण नहीं बल्कि संस्कृति को सम्मान, पहचान और सरकारी ढांचे से जोड़ने की एक सशक्त पहल है।धरती आबा अभियान केवल सरकारी योजनाओं का प्रचार नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की एक ठोस कार्ययोजना है। भाजपा सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक भी पात्र हितग्राही योजनाओं से वंचित न रहे।

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