जिले की एकमात्र शुगर मिल को लेकर बीजेपी कांग्रेस में घमासान, देखना होगा ऊंट किस करवट बैठता है।
बुरहानपुर(न्यूज़ ढाबा)–जिले का एकमात्र सहकारी क्षेत्र का नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना इन दिनों काफी सुर्खियों में है कारण है कारखाना के संचालक मंडल का 13 साल बाद चुनाव होना चुनाव को लेकर कांग्रेस बीजेपी में सियासी घमासान शुरू हो गया है कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं के इशारे पर बडी संख्या में गन्ना उत्पादक किसानो चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अपात घोषित करने का आरोप लगाया है उधर बीजेपी ने आरोपो को निराधार बताेत हुए दावा किया चुनाव पूरी तरह से सहकारिता के नियम के अनुसार पारदर्शिता के साथ हो रहे है
गौरतलब है यह कारखाना 13 वर्षों से दिवंगत सांसद व कारखाना के संस्थापक ठाकुर शिवकुमार सिंह की पत्नी और उनके परिवार के हाथो था किशोरीदेवी शिवकुमार सिंह 13 साल से कारखाना की अध्यक्ष रही है चुनाव प्रक्रिया में 6700 किसानों में से लगभग 6000 किसानों को अपात्र घोषित कर दिया गया है जिसे कांग्रेस ने बीजेपी और राज्य सरकार के इशारे पर अफसरों व्दारा साजिश करार दिया है पूर्व अध्यक्ष किशोरीदेवी शिवकुमार सिंह चौहान ने प्रेस वार्ता लेकर आरोप लगाया बीजेपी के नेताओं के इशारे पर कारखाने क बंद करने की साजिश की जा रही है पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भी ट्वीट करके इसका समर्थन करते हुए प्रदेश की मोहन यादव सरकार पर तंज कसते हुए इसे किसान व मजदूर विरोध सरकार करार देते हुए न्याय के लिए लडने की बाद कही
उधर बीजेपी ने इन आरोपो को नकारते हुए बीजेपी के जिला महामंत्री व कारखाना के निर्विरोध डेलीगेट्स निर्वाचित हुए राहुल जाधव ने कहा चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और सहकारी नियमों के तहत की जा रही है उन्होने कहा ठाकुर परिवार के सत्ता से बाहर होने की वजह से विपक्षी पार्टी बौखला गई है इस बार काखाना की कमान गन्ना उत्पादक किसानों के हाथो में होगी
इसके अलावा शक्कर कारखाने के कामकाज में बुरहानपुर के पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा व उनके परिवार के युवाओ के दखल को लेकर भी गन्ना उत्पादक किसान खासे नाराज है किसान उज्जवल पाटील का कहना है ठाकुर परिवार ने हमेशा दिवंगत सांसद शिवकुमार सिंह की पत्नी किशोरीदेवी शिवकुमार को आगे करते किसानों के साथ इमोशनल कार्ड खेला लेकिन अब किसान जागरूक हो गए है और वे इस बार कारखाने की कमान उन किसानों को सौंपने की योजना बना रहे है जिन्होने अपने खून पसीने से गन्ने की खेती की है
यह सियासी घमासान अब चुनाव की ओर बढ़ रहा है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कारखाने की कमान किसके हाथों में जाती है – क्या कांग्रेस और ठाकुर परिवार की दावेदारी कायम रहती है, या असल गन्ना उत्पादक किसान इस बार सत्ता में बदलाव लाते हैं।