नारी सृजन का केंद्र है, वर्तमान में टीवी सीरियल ने नारी के सम्मान को तार-तार किया है।
बुरहानपुर (न्यूज़ ढाबा)–डॉ नूपुर देशकर जी ने बताया कि भारतीय नारी राष्ट्रीय की आदिशक्ति है। कोविड के समय पत्नी ने जो सहयोग दिया वह अकल्पनीय है स्त्री का उद्भव भगवान शंकर जी के प्रभाव से हुआ,भारतवर्ष में यह मान्यता है कि महिलाओं को शमशान में जाने का अधिकार नहीं है परंतु यह एक मिथक मात्र है शमशान में वैराग्य का भाव उत्पन्न होता है हम पुनर्जन्म में विश्वास रखते हैं स्त्री सृजन का माध्यम होती है सृजन कर्मों से मिलता है ।
भारतीय नारी राष्ट्र की आदि शक्ति है। कालांतर में इसकी कई उदाहरण देखने को मिलते हैं जैसे की सावित्रीबाई फुले ने जो शिक्षा का अलख जगाया है वह अकल्पनीय है, नारी शक्ति दो कुलों का उद्धार करती है, दो कुलों को शिक्षित करती है। वर्तमान मैं टीवी सीरियल के माध्यम से हिंदू संस्कृति को दूषित किया जा रहा है उन्होंने एकता कपूर का नाम लेते हुए बताया कि उनके सीरियल में हमेशा हिंदू धर्म एवं संस्कृति का उपहास उड़ाया जाता है, महिला को एक उपभोग की वस्तु मानकर उसकी नुमाइश की जाती है, शेविंग क्रीम के विज्ञापन में महिला का होना गले नहीं उतरता। उन्होंने बताया मेहंदी महिला श्रंगार का उल्लेख किसी भी धर्म ग्रंथ में नहीं है। मेहंदी लगाते वक्त हम अपना हाथ दूसरों के हाथ में सहज रूप से दे देते हैं जो कि विधि सम्मत नहीं है।
किस तरह पश्चात संस्कृति भारत के युवाओं पर हावी हो रही है इसका एक ज्वलंत उदाहरण है
DINK (डबल इनकम नो किड्स) वर्तमान परिदृश्य में यह विचार युवाओं में घर कर रहा है वह किसी तरह की सामाजिक बंधन में बंधना नहीं चाहते। जिम्मेदारियां बढ़ जाने पर स्वतंत्रता नष्ट होती है। वे केवल स्वयं का मनोरंजन एवं लाइफस्टाइल के बारे में विचार किया जाता है। जो आने वाले समय के लिए ठीक नहीं है।
हिंदू धर्म संस्कृति में गहनों का विशेष महत्व बताया गया है महिलाओं की प्रकृति ईश्वर ने अलग बनाई है इसलिए कमर के ऊपर के भाग में सोना पहना जाता है एवं कमर के निचले हिस्से में चांदी। कमर के ऊपर सोना पहनने से शरीर में रक्त का संचार सुचारू रूप से होता है एवं कमर के निचले हिस्से में चांदी पहनने से शीतलता का एहसास मातृशक्ति में आता है।
शाम का भजन पूरे परिवार के साथ में करना चाहिए इसे ग्रहण की स्थिति अनुकूल होती है एवं अवसाद से बचा जा सकता है परिवार में परस्पर प्रेम और समानता भाव उत्पन्न होता है।
रानी दुर्गावती का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने 52 तालाब 45 पोखर 200 का निर्माण कर एक बेहतरीन जल व्यवस्था का उदाहरण स्थापित किया दुर्गावती का सम्मान अकबर ने भी किया था।
कार्यक्रम के प्रारंभ में भारत माता एवं डॉक्टर हेडगेवार के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई इसके पश्चात एकल गीत का गायन किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में समाजसेवी साहित्यकार श्रीमती पुर्णिमा हुंडीवाला वाला उपस्थिति रही।
पूजनीय डॉक्टर हेडगेवार व्याख्यान माला के अध्यक्ष श्री प्रशांत श्रॉफ मुख्य वक्ता श्रीमती नूपुर देशकर एवं श्रीमती पूर्णिमा हुंडी वाला का शाल एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया गया कार्यक्रम के अंत में वंदे मातरम का गायन कर कार्यक्रम के समाप्ति की घोषणा की गई।
इस अवसर पर सुधि श्रोता के रूप में शहर के प्रबुद्ध नागरिक एवं मातृशक्ति उपस्थिति रही।

